प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना का ग्रामीण विकास में योगदान

(रीवा जिले के विशेष सन्दर्भ में)

 

क़मर इज़हार1, राबिया बानो अंसारी2

1से.नि.प्राध्यापक (अर्थशास्त्र), शा. महाविद्यालय नईगढ़ी, जिला रीवा (.प्र.)

2शोधार्थी (अर्थशास्त्र), शा. ठा..सिंह महाविद्यालय, रीवा (.प्र.)

*Corresponding Author E-mail:

 

ABSTRACT:

भारत गांवों का देष है। महात्मा गांधी कहा करते थे, भारत की आत्मा गांवों में बसती है।’’प्रकृति के सुकुमार कवि सुमित्रानन्दन पन्त ने लिखा है-भारत ग्रामवासिनी है। यहां की सभ्यता एवं रीति-रिवाज ग्राममय है। पूरे राष्ट्र के विकास के लिए ग्रामों का विकासित होना अनिवार्य है। विकास की राष्ट्रीय धारा में गांवों को भी कैसे जोड़ा जाए एवं उनका विकसित स्वरूप कैसा हो यह आज भारत के विकास के रणनीतिकारों के समक्ष एक गंभीर चुनौती है। वर्षो तक ग्रामीण विकास के लिए संगठित प्रयास करने वाले प्रसिद्ध समाजसेवी नाना जी देषमुख ने ग्रामीण विकास को परिभाषित करते हुए बताया कि हमारे गांव ऐसे हो जहां कोई गरीब हो, कोई बेरोजगार हो, कोई बीमार हो, गांव में कोई विवाद हो तथा गांव का परिवेष स्वच्छ, हरा-भरा एवं प्रदूषण रहित हो।

 

KEYWORDS: ग्रामीण विकास।

 

 


INTRODUCTION:

कभी सोने की चिड़िया रहा हमारा देष सदियों के चलते अविकसित एवं पिछड़ेपन से ग्रस्त है। भारत में 6,49,481 गांवों में देष की 70 प्रतिषत जनसंख्या निवास करती है। इन ग्रामों में लगभग आधी जनसंख्या गरीबी रेखा के नीचे निवास करती है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था कृषि पर आधारित होने तथा कृषि मानसून पर आधारित होने के कारण गांवो में मात्र चार महीने का रोजगार ही मिल पाता हैं, जिसके कारण वे शहरों में पलायन करने के लिए मजबूर हो जाते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में क्रय षक्ति में निरन्तर कमी होती जा रही है। ग्रामीण जनता को कृषि उत्पादन का बहुत ही कम मूल्य मिलता है। आजादी के छः दषक बाद भी गांव में कृषक, ऋण की बेड़ी से जकड़ा हुआ है। कई बैकिंग एवं वित्तीय संस्थाओं की स्थापना के बावजूद गांव के लोग 60 प्रतिषत से अधिक वित्तपूर्ति देषी महाजन से करते है। आज गरीबी मिटाने की कई योजनाएं हैं जैसे-समन्वित ग्रामीण विकास कार्यक्रम, राष्ट्रीय रोजगार कार्यक्रम आदि। लोगों के बहुमुखी विकास के लिए सरकार ने पंचवर्षीय योजनाओं के माध्यम से अनेक कार्यक्रम चलाये। कृषि की मूलभूत आवष्यकताओं को पूरा करने के लिए योजनाएं बनाई और उनको कार्यान्वित करने का यथा-सम्भव प्रयास किया गया है। पिछले 50 वर्षों की प्रगति पर निगाह डालें तो एक षंका सी पैदा होती है कि जितना धन विकास योजनाओं पर खर्च किया गया क्या उतनी उपलब्धि प्राप्त हुई।

 

भारत सरकार ने 25 दिसंबर 2000 को प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की शुरुआत की थी। इस योजना का प्रमुख उद्देश्य ग्रामीण इलाकों में 500 या इससे अधिक आबादी वाले (पहाड़ी और रेगिस्तानी क्षेत्रों में 250 लोगों की आबादी वाले गांव) सड़क-संपर्क से वंचित गांवों को बारहमासी सड़कों से जोड़ना है। तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के वक्त से ही इसका नाम प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना है। इस स्कीम का सबसे बड़ा फायदा गांवों को होगा, जहां छोटे किसान शहरों से सीधे जुड़ सकेंगे और अपनी फसल बेच पाएंगे। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना में सड़कों को सही रखना यानि अगर किसी तरह की परेशानी से सड़क खराब होती है तो उसका भी ख्याल रखा जाएगा।

 

आजीविका, स्वास्थ्य और उत्पादकता में सुधार और गरीबी में कमी के साथ ग्रामीण बुनियादी ढांचे का सीधा संबंध है। सड़कें ग्रामीण समुदायों के लिए जीवन रेखा हैं, जो उन्हें बाजार, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य सुविधाओं से जोड़ती हैं। बेहतर सड़कें हर मौसम में बेहतर बाजार पहुंच प्रदान करती हैं, जिसके परिणामस्वरूप अनुकूल इनपुट और आउटपुट कीमतों में परिणाम होता है और ग्रामीण गरीबों की आर्थिक स्थिति में सुधार होता है। भारत सरकार ने विकास और विकास में तेजी लाने के लिए बिजली, उद्योग, परिवहन और शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी आवश्यक सामाजिक सेवाओं में भारी निवेश किया। ग्रामीण विकास में सरकारों द्वारा बड़े पैमाने पर निवेश के बावजूद, यह स्पष्ट था कि ग्रामीण क्षेत्र ज्यादा प्रगति नहीं कर रहे थे। ग्रामीण आबादी के पास नौकरी के अवसरों के लिए शहरी क्षेत्रों में प्रवास करने के अलावा कोई विकल्प नहीं था और पहुंच की कमी ने भी ग्रामीण क्षेत्रों में काम करने के लिए शिक्षकों, डॉक्टरों और अन्य पेशेवरों को प्रेरित करने के लिए सरकारों के कई प्रयासों के वांछित प्रभाव को सीमित कर दिया। 90 के दशक के अंत तक, लगभग 70 गाँव सभी मौसम वाली सड़कों से नहीं जुड़े थे और एक केंद्रित दृष्टिकोण उस समय की आवश्यकता थी जब भारत सरकार ने 25 दिसंबर 2000 को प्रधान मंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) शुरू करने का फैसला किया। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) एक सौ प्रतिशत केंद्र प्रायोजित योजना है, जिसका मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में सभी योग्य असंबद्ध बसावटों को हर मौसम में सड़क संपर्क प्रदान करना है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना मौजूदा ग्रामीण सड़कों के उन्नयन का भी प्रावधान करता है। इस कार्यक्रम के द्वारा, सरकार ग्रामीण भारत के विकास को बढ़ाने का प्रयास करती है।

 

इस कार्यक्रम की वास्तविकता को समझने के लिए, प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना का ग्रामीण विकास में योगदान शीर्षक के साथ एक सूक्ष्म स्तर का अध्ययन तैयार किया गया है। यह देखने का प्रयास किया गया है कि रीवा जिले के ग्रामीण विकास पर इस कार्यक्रम का कितना प्रभाव पड़ा है।

 

ग्रामीण विकास से अभिप्राय है ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले अनेकानेक निम्न आय वर्ग के लोगों के जीवन स्तर में सुधार लाना और उनके विकास के क्रम को आत्मपोषित बनाना। यह एक ऐसी व्यूह रचना है जो लोगों को एक विषिष्ट समूह निर्धन ग्रामीण के आर्थिक एवं सामाजिक जीवन को उन्नत करने के लिए बनायी गयी है। इसके माध्यम से विकास के लाभों को ग्रामीण क्षेत्रों में जीवन-यापन की तलाश में लगे निर्धनतम लोगों तक पहुंचाना है।

 

भारत ग्राम्य प्रधान देश है। भारत की लगभग 72 प्रतिशत जनता गाँवों में निवास करती हैं कृषि यहाँ के लोगों का मुख्य आधार है। स्वाधीनता के पश्चात् ग्रामीण विकास के क्षेत्र में अनेक उतार-चढ़ाव आये हैं। भारतीय ग्रामीण समाज में एक नवीन चेतना का प्रादुर्भाव हुआ। परम्पराओं, रीति-रिवाजों, रूढ़ियां, अंधविश्वासों, लोक विश्वासों आदि से जुड़ा ग्रामीण समाज भारतीय संस्कृति का प्रतिनिधित्व करता है।

 

वास्तव मंे भारत मे ग्रामीण विकास गाँवों में आधारभूत संरचना उपलब्ध कराकर ही संभव है। ग्रामीण विकास का अर्थ लोगों को होने वाले आर्थिक लाभों के साथ-साथ समाज के सम्पूर्ण ढ़ाचे में होने वाले अधिकाधिक परिवर्तनों से लगाया जाता है, किन्तु विकास के लाभ ग्रामीणों तक पहुँचाने के लिए सबसे पहले आवश्यक है, उनके दृष्टिकोण मंे बदलाव और मानसिकता में परिवर्तन। इसके लिए संचार संवाद की प्रक्रिया को अपनाया जा सकता है, किन्तु सदियों से ग्रामीणजनों के दिलो-दिमाग में बसी धारणाओं, मान्यताओं विष्वासों को बदलना आसान नहीं है। ऐसी स्थिति में बदलाव लाने वाले तत्वों की भूमिका अत्यन्त चुनौतीपूर्ण हो जाती है।

 

ग्रामीण जनों के लिए आर्थिक विकास की बेहतर संभावनाएँ उसी स्थिति में हो सकती है, जब ग्रामीण विकास कार्यक्रमों में जनता की अधिकाधिक सहभागिता हो, इस हेतु त्रिस्तरीय पंचायती राज-संस्थाएँ, सरकारी विभाग और जन-प्रतिनिधि निरंतर प्रयत्नशील होने चाहिए। ग्रामीण विकास की पहली शर्त है, ग्रामीण जनता को जागरूक कर एवं उनका सशक्तीकरण जो उनके शिक्षा, ज्ञान, क्षमता, दक्षता और नये वैज्ञानिक अविष्कारों को स्वीकार करने की प्रवृत्ति को बढ़ाकर ही संभव है। हर कार्य कठिन और चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि हमें केवल विकास प्रक्रिया को जारी रखना है, बल्कि साथ ही साथ अपनी सभ्यता और संस्कृति को भी बनाये रखना है। हमारी सदियों पुरानी विरासत जो हमारी संस्कारों और संस्कृति के रूप में मिलती है, उसे संरक्षित रखते हुए अपने सम्पूर्ण व्यक्तित्व का विकास करना है, तभी ग्रामीण विकास का सपना पूरा हो पायेगा।

 

पूर्व शोध साहित्य की समीक्षा:-

सुबोध रानी, (2016): हरियाणा में सड़क परिवहन नेटवर्क और क्षेत्रीय विकास’’ ने निष्कर्ष निकाला कि सड़क परिवहन अब तक बुनियादी ढांचे के एक महत्वपूर्ण तत्व के रूप में उभरा है, इसका हरियाणा में विकास के वितरण पैटर्न पर कोई बड़ा प्रभाव नहीं है और सुझाव दिया है। कि, राज्य के संतुलित क्षेत्रीय विकास के लिए अध्ययन क्षेत्र में विभिन्न जिलों के बीच विद्यमान विषमताओं को समाप्त करना आवश्यक है। सरकार को राज्य के चरम पश्चिमी और दक्षिणी हिस्सों में क्षेत्रीय विकास के प्रदर्शन में सुधार के लिए आवश्यक कदम उठाने चाहिए।

 

घोष, मधुसूदन (2017): ग्रामीण भारत में बुनियादी ढांचा और विकास,’’ लेखकों ने भारत के 16 प्रमुख राज्यों में ग्रामीण बुनियादी ढांचे की स्थिति का मूल्यांकन किया और ग्रामीण विकास के कुछ आय और गैर-आय आयामों पर उनके प्रभाव की जांच की। लेखक ने पाया कि कृषि उत्पादकता और उत्पादन में वृद्धि, बेहतर भौतिक और सामाजिक बुनियादी सुविधाओं और आजीविका के अवसरों से ग्रामीण साक्षरता और जीवन प्रत्याशा में सुधार होता है, और ग्रामीण गरीबी और शिशु मृत्यु दर में कमी आती है।

 

काले, अप्पा एम. और डॉ. पिंपलीकर, एसएस (2017): प्रधान मंत्री ग्राम सड़क योजनारू अतीत, वर्तमान और भविष्य’’ खोजें कि ‘‘प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना सड़कों के निर्माण के बाद, रोजगार के अवसरों में सुधार, स्वयं के लिए नई संभावना- अध्ययन क्षेत्र में रोजगार पाये जाते हैं। सकारात्मक प्रभाव स्वास्थ्य देखभाल, शिक्षा सुविधाओं और सरकारी अधिकारियों के दौरे प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के निर्माण के कारण हर मौसम में पहुंच में वृद्धि में पाया गया।

 

बिस्वास, रेंटू और .के.एम. अनवरुज्जमां, (2018): सामाजिक-आर्थिक विकास पर प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना का प्रभाव - चांदपुर कुशाबरिया रोड, मुर्शिदाबाद जिला, पश्चिम बंगाल का एक केस स्टडी’’शोध के प्रमुख निष्कर्ष हैं ष्एचवाईवी बीज, रासायनिक उर्वरक, कीटनाशकों जैसे कृषि आदानों तक आसान पहुंच के कारण कृषि का उत्पादन बढ़ा है। कीटनाशक, शाकनाशी। कुछ नकदी फसलें सड़कों के निर्माण के बाद अध्ययन क्षेत्र में हाल ही में शुरू की गई हैं। पारंपरिक परिवहन साधनों को मोटर चालित वाहनों द्वारा प्रतिस्थापित किया जाता है और यह भी उल्लेख किया गया है कि भूमि की कीमत में वृद्धि पर सड़क का सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। निर्माण प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना ने घर निर्माण सामग्री तक पहुंचने के लिए एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, इसके कारण प्रतिवादी ने अपने कच्चे घर को पक्के में परिवर्तित कर दिया और अंत में निष्कर्ष निकाला कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना ने सुदूर अध्ययन क्षेत्र के ग्रामीण लोगों के लिए आधुनिकता और आत्मनिर्भरता में बहुत महत्वपूर्ण और महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

 

उद्देश्य:-

·        प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना से लाभार्थियों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति का अध्ययन करना।

·        प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना कार्यक्रम का ग्रामीण कृषि निवेष पर प्रभाव का अध्ययन करना।

·        प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना कार्यक्रम के कार्यान्वयन का मूल्यांकन करना।

·        रीवा जिले में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की प्रगति का अध्ययन करना।

·        प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के कार्यान्वयन के बाद रीवा जिले के ग्रामीण क्षेत्र के आवश्यक मापदंडों में परिवर्तन का अध्ययन करना

·        रीवा जिले की ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के प्रभाव का आकलन करना।

 

अतः षोध का विषय अत्यन्त जटिल होते हुए भीग्रामीण विकास में प्रधानमंत्री सड़क योजना का अवदान-एक अध्ययन जैसे महत्वपूर्ण विषय का चयन किया गया।

 

शोध का औचित्य:-    

किसी शोध कार्य की शुरुआत किसी उद्देश्य को लेकर होती है। यह उद्देश्य अपना एक विशेष महत्व रखता है। किसी भी शोध प्रबंध कार्य को आरम्भ करने से पहले यह जान लेना अत्यंत आवश्यक है कि वर्तमान शोध क्यों किया जा रहा है ? शोध की समस्यॉयें क्या हैं ? इन समस्याओं का अध्ययन कर सही सुझाव एवं परामर्श देकर, संभावित परिणाम एवं निष्कर्ष तक पहुॅचना ही शोध का औचित्य है। किसी भी शोध कार्य को तभी सकल माना जाता है जब उसका वास्तविक निष्कर्ष निकले एवं सही परिणाम सामने आये तथा परिणाम सार्थक हों।

 

शोध प्रविधि:-

शोध या अन्वेषण किसी विशिष्ट प्रयोजन के लिए किया जाता है। ज्ञान की किसी भी शाखा में ध्यानपूर्वक नये तथ्यों की खोज के लिए किये गये अन्वेषण या परिक्षण को अध्ययन कहते है। ज्ञान के क्षेत्र में अनुसंधान कार्य अपरिहार्य है।

 

शोध कार्य में महिला उद्यमिता एवं स्वरोजगारमूलक योजनाओं से सम्बन्धित वास्तविक एवं विश्वसनीय आकड़ो को प्राप्त करने के लिये प्राथमिक एवं द्वितीयक दोनों प्रकार के आकड़ों को एकत्र कर पूर्ण किया गया है। प्राथमिक आकड़े स्वयं कार्य स्थल पर जाकर मूल स्त्रोतो से एकत्र किये गये हैं। जबकि द्वितीयक आंकड़े महिला उद्यमिता एवं स्वरोजगारमूलक योजनाओं की समस्या से संबंधित विभिन्न प्रकाशित- अप्रकाशित पुस्तकों, शोध पत्र-पत्रिकाओं, समाचार पत्रों, शासकीय प्रतिवेदनों आदि से एकत्र कर प्रयोग किये गये हैं। इसके अतिरिक्त लाइब्रेरी, एवं इंटरनेट आदि का भी आकड़ें एवं विषय वस्तु से संबंधित स्टडी मटेरियल एकत्र करने में प्रयोग किया गया है।

 

अध्ययन क्षेत्र -

किसी भी शोध अध्ययन के व्यवस्थित अध्ययन के लिये उसके क्षेत्र का निवर्हन भी करना चाहिए। क्षेत्र का निर्धारण आवश्यकता और उपयुक्तता के आधार पर किया जाता है। यदि शोध का क्षेत्र छोटा होगा तो हो सकता है कि वह शोध अध्ययन के निष्कर्षो से काफी दूर हो जाय। अर्थात निष्कर्ष विश्वसनीय नहीं रह जाते और यदि शोध क्षेत्र व्यापक हो तो इसे समय औंर श्रम की अत्यधिक आवश्यकता पड़ती है तथा आर्थिक साधन भी बहुत अधिक खर्च करने पड़ते है। शोधर्थों का कार्य क्षेत्र सम्पूर्ण जिला है, जो प्रशासकीय दृष्टि से 07 तहसीलों में बंटा है जिले में 501 ग्राम पंचयाते हैं शोध प्रबंध में चुने गये गावों तथा ग्रामीण विकास के विभिन्न पक्षकारों से प्रश्नावली के माध्यम से समस्या के समाधान का प्रयास किया गया है।

चूँकि शोधार्थी का अध्ययन क्षेत्र रीवा जिला को लिया गया है। रीवा जिलाका क्षेत्रफल 6314 वर्ग किमी. है। जनगणना 2011 के अनुसार रीवा जिले की जनसंख्या 2365106 है, जिसमें पुरूष 1225100 एवं महिला 1140006 शेष एवं अन्य वृद्ध एवं बच्चे सम्मिलित है। रीवा जिले का जनसंख्या वृद्धि 19ण्86 है, जिले का लिंग अनुपात 1000 पुरूष पर 931 महिला है तथा साक्षरता दर 71ण्62 है जिसमें पुरूष साक्षरता 81ण्43 एवं महिला साक्षरता 61ण्16 है। रीवा जिले जनसंख्या घनत्व 375 व्यक्ति प्रति वर्ग कि.मी. है।

 

शोध परिकल्पनाएँ:-

1-  ग्रामीण विकास योजनाओं में महिलाओं की सहभागिता पुरूषों की तुलना में कम होती हैं।

2-  ग्रामीण विकास योजनाओं से लाभान्वित हितग्राहियों की स्थिति गैर लाभान्वित हितग्राहियों से कम होती हैं।

3-  ग्रामीण विकास योजनाओं के क्रियान्वयन ने ग्रामीणों में सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक जागरूकता में वृद्धि किया हैं।

4-  अध्ययन में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की प्रगति उल्लेखनीय नहीं है।

5-  प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के लागू होने से अध्ययन क्षेत्र के ग्रामीण विकास के मानकों में कोई खास बदलाव नहीं आया है।

 

निष्कर्ष:-

रीवा जिले की ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के प्रभावों के विश्लेषण के लिए अध्ययन किया गया है। सरकार के निवेश का महत्वपूर्ण उद्देश्य प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के माध्यम से हर मौसम में ग्रामीण सड़क संपर्क की उपलब्धता को बढ़ाकर ग्रामीण क्षेत्र को विकास प्रक्रिया की मुख्य धारा में शामिल करना है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना द्वारा प्रदान की गई निरंतरता और निर्बाध कनेक्टिविटी ने गांवों के लिए हर मौसम में माल और सेवाओं के प्रवाह को खोल दिया है और ग्रामीणों के लिए गांवों के बाहर सुविधाओं तक नियमित और तेज पहुंच प्रदान की है। सर्वेक्षण के आंकड़ों से यह भी पता चलता है कि पूर्व-सड़क अवधि की तुलना में लोगों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति और जीवन की गुणवत्ता में बस्तियों में काफी सुधार हुआ है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना द्वारा प्रदान की गई बेहतर सड़क समृद्धि और विकास के लिए आवश्यक पर्यावरण में सुधार करती है। देश के सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए आधारभूत संरचना बुनियादी ढांचा है। भले ही इसे उत्पादन के लिए एक आवश्यक इनपुट के रूप में नहीं माना जाता है, लेकिन यह आर्थिक गतिविधियों में तेजी लाने के लिए एक सूत्रधार है।

 

सुझाव:

1- प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के विषय में ग्रामीणों के बीच जागरूकता बढ़ाना चाहिए, क्योंकि अभी भी बहुत सारे ऐसे ग्रामीण लोग है, जो इस योजना के बारे में नहीं जानते है।

2- प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के निर्माण कार्य में सड़कों की गुणवत्ता उच्च कोटि की होनी चाहिए।

3- प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के द्वारा निर्मित सड़कों की गुणवत्ता की निगरानी के लिए इस योजना के अंतर्गत कार्यरत अभियंताओं को निर्माण स्थल का समय-समय पर निरीक्षण करना चाहिए। सड़कों के निर्माण के लिए प्रयुक्त की जा रही सामग्री की गुणवत्ता की जांच की जानी चाहिए, ताकि निर्मित की जा रही सड़कों का जीवनकाल अधिक से अधिक हो सके।

4- प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के द्वारा निर्मित सड़कों के निर्माण कार्य पूर्ण किये गये ठेकेदारों के द्वारा पांच साल तक मरम्मत किये जाने की जिम्मेदारी होती है, इस अवधि को और बढ़ाना चाहिए ताकि सड़कों की निरंतर मरम्मत हो सके।

5- प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अन्तर्गत निर्मित की गयी सड़कों को यात्रा और परिवहन के लिहाज से अधिक से अधिक सुरक्षित बनाया जाना चाहिए।

6- प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के द्वारा निर्मित की गयी सड़कों में खराब पैच, जलभराव, साइनबोर्ड होने की वजह से ग्रामीणों को दुर्घटनाओं का सामना करना पड़ जाता है। अतः ऐसी स्थिति से बचने के लिए सड़क का उचित ढंग से रखरखाव किया जाना चाहिए।

 

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Received on 27.03.2024         Modified on 12.04.2024

Accepted on 21.04.2024         © A&V Publication all right reserved

Int. J. Rev. and Res. Social Sci. 2024; 12(1):77-82.

DOI: 10.52711/2454-2687.2024.00013